समझदार के स्वार्थ की कथा | Samjhdar Ke Swarth Ki Katha समझदार के स्वार्थ की कथा | Samjhdar Ke Swarth Ki Katha : वरुणादि पर्वत के
Tag: Rongte Khade Kar Dene Wali Kahani
सही समय की घडी | Sahi Samay Ki Ghadi सही समय की घडी | Sahi Samay Ki Ghadi : किसी नगर में यज्ञदत्त नाम का एक
बन्दर का मीठा कलेजा | Bandar Ka Meetha Kaleja बन्दर का मीठा कलेजा | Bandar Ka Meetha Kaleja : एक समुद्र के तट पर सभी ऋतुओं
बार बार शत्रुता का फल | Baar Baar Shatruta Ka Fal बार बार शत्रुता का फल | Baar Baar Shatruta Ka Fal : किसी कुएं में
मुर्ख गधा | Murkh Gadha मुर्ख गधा | Murkh Gadha : किसी वन में करालकेसर नाम का एक सिंह रहता था। धूसरक नाम का एक गीदड़
झूठा युधिस्ठिर | Jhutha Yudhisthir झूठा युधिस्ठिर | Jhutha Yudhisthir : किसी नगर में युधिष्ठिर नामक एक कुम्हार रहता था। एक बार दौड़ते हुए वह गिर
समझौता स्वाभाव से | Samjhauta Swabhav Se समझौता स्वाभाव से | Samjhauta Swabhav Se : किसी वन में एक सिंह-दम्पति रहते था। एक बार सिंहनी ने
अविश्वासी स्त्री | Avishwasi Stri अविश्वासी स्त्री | Avishwasi Stri : किसी नगर में एक ब्राह्मण रहा करता था। वह अपनी स्त्री को प्राणों से भी
वाचालता का परिणाम | Vachalta Ka Parinam वाचालता का परिणाम | Vachalta Ka Parinam : किसी नगर में शुद्धपट नाम का एक धोबी रहता था। उसके
मुर्ख चरित्रहीन स्त्री | Murkh Charitrhin Stri मुर्ख चरित्रहीन स्त्री | Murkh Charitrhin Stri : किसी स्थान में एक कृषक – दम्पती निवास करते थे। किसान
ऊंट के गले में घंटा | Unt Ke Gale Mein Ghanta ऊंट के गले में घंटा | Unt Ke Gale Mein Ghanta : किसी गांव
चालाक सियार | Chalak Siyar : किसी जंगल में एक गीदड़ रहा करता था। उसका नाम था, महाचतुरक। शिकार की तलाश में वह वन के विशाल
केवल अपना घर | Keval Apna Ghar केवल अपना घर | Keval Apna Ghar : किसी नगर में चित्रांग नाम का एक कुता रहता था। दैवयोग
सबके भाग्य में कुछ और लिखा हैं | Sabke Bhagya Mein Kuch Aur Likha Hain सबके भाग्य में कुछ और लिखा हैं | Sabke Bhagya
बिना विचार काम पछतावा ही लाता हैं | Bina Vichar Kam Pachhtava Hi Lata Hain बिना विचार काम पछतावा ही लाता हैं | Bina Vichar